Tuesday, September 7, 2010

आज हवा में कुछ नमी सी है
















आज हवा में कुछ नमी सी है,

दिल की धडकन कुछ थमी सी है.


मौसम के साथ, भीग गए है ख़याल भी,

कुछ यादों की महक सी आ रही है रुक रुक के,

सीने में खलिश एक अनकही सी है,


आज हवा में कुछ नमी सी है,

दिल की धडकन कुछ थमी सी है.


देखता हूँ जब दूर तक, परिंदों के साथ एक चेहरा उड़ता दिखता है,

नज़र उठ के जब गिरती है, आँखों में भर जाते हैं कुछ पुराने ख्वाब,

उठती क्यूँ  एक बेचैनी सी है,


आज हवा में कुछ नमी सी है

दिल की धडकन कुछ थमी सी है.


वो मुंडेर पे बैठी कोयल, जब  झाड़ती है अपने परों से पानी,

उसके छीटें कुछ पहचाने से लगते हैं,  मुझसे कुछ कहते हैं,

क्यूँ आज लगती  कुछ कमी सी है


आज हवा में कुछ नमी सी है,

दिल की धडकन कुछ थमी सी है.


ख्यालों का रंग हो गया है, पेड़ के नए हरे पत्तों की मानिंद

उनमे कुछ जान आ गयी है फिर से,

ये तल्खी कुछ नयी  सी है,


आज हवा में कुछ नमी सी है,

दिल की धडकन कुछ थमी सी है.


नई मिटटी की सोंधी खुशबू कर जाती है सराबोर बार बार,

गुज़रे हुए लम्हे जैसे फिर ताज़ा हो गए है, नई रसद से

फिर जग रही एक उम्मीद सी है,


आज हवा में कुछ नमी सी है,

दिल की धडकन कुछ थमी सी है.

2 comments:

  1. 'dekhta hoon jab door tak parindon ke saath ek chehre udta dikhta hai......'wah ...bahut hi
    achhi rachna hai aseem ji ... congrates

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  2. aapke is naye roop se mulakaat ho gayi.. bahut sundar rachna ha.. agar isey ghazal ka naya roop kahun to galat nahin hog..badhai...

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