Monday, December 31, 2012

नव वर्ष मंगलमय हो !!

भेड़िये रहें जंगलों में ही,


इतना गोश्त और खून मिलता रहे उन्हें कि

आदमखोर न बनने पायें,

और शहरों में शिकार पर न निकलें

वातावरण निर्भय हो !!

नव वर्ष मंगलमय हो!!

प्रेम और करुणा “धर्म ग्रंथों” तक ही न रहें सीमित

वासना और पाशविकता, पशु की ही पहचान रहें

मानव, मानव ही रहे,

नारी को नर का न भय हो,

नव वर्ष मंगलमय हो!!

1 comment:

  1. What a data of un-ambiguity and preserveness of valuable know-how regarding unexpected feelings.



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